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पंजाब में भाजपा इस बार खेलेगी सिख कार्ड

पंजाब में भाजपा इस बार खेलेगी सिख कार्ड वैकल्पिक हेडिंग पंजाब में नई रणनीति के साथ उतरेगी भाजपा, सिख राजनीति पर फोकस पंजाब नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भाजपा नेतृत्व इस बार पंजाब चुनाव में नई रणनीति के साथ चुनाव मैदान में…

Hindustan के अनुसार26 सितंबर 2026 को 02:05 pm बजे
पंजाब में भाजपा इस बार खेलेगी सिख कार्ड

सौजन्य से:- Hindustan

पंजाब में भाजपा इस बार खेलेगी सिख कार्ड

वैकल्पिक हेडिंग पंजाब में नई रणनीति के साथ उतरेगी भाजपा, सिख राजनीति पर फोकस पंजाब

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भाजपा नेतृत्व इस बार पंजाब चुनाव में नई रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में है। पार्टी इस बार सिख राजनीति को प्रमुखता से आगे बढ़ा रही है और उसने केंद्रीय राजनीति से रवनीत सिंह बिट्टू को प्रदेश के चुनावी मैदान में उतार दिया है। रवनीत सिंह बिट्टू के साथ प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लो और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भाजपा के प्रमुख सिख चेहरे हैं। इसके अलावा गैर सिख नेताओं में पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़, तरुण चुग, राघव चड्ढा को प्रमुखता दी जा रही है। पंजाब में भाजपा इस बार अपनी जमीन बढ़ाने से आगे सत्ता की लड़ाई में उतरी है। बीते कई दशकों से राज्य में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में गैर सिख राजनीति और शहरी क्षेत्रों पर केंद्रित रही थी। यही वजह है कि भाजपा में कोई प्रमुख सिख चेहरा नहीं उभर सका। अकाली दल के दबाब में उसका विस्तार भी पूरी तरह से नहीं हो सका था, लेकिन बीते कुछ सालों में खासकर अकाली दल के साथ गठबंधन टूटने के बाद उसने अपनी रणनीति बदली है। राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद भाजपा ने भी राज्य की बदलती राजनीतिक तासीर को देखते हुए इस बार अपनी सत्ता की मजबूत दावेदारी पेश की है.

सिख राजनीति में वर्चस्व की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, भाजपा का मानना है कि पंजाब में सत्ता तक पहुंचने के लिए सिख राजनीति में वर्चस्व कायम करना जरूरी है। यही वजह है कि उसने अपने साथ प्रभावी सिख नेताओं को जोड़ा है। इनमें अधिकांश सिख नेता कांग्रेस से भाजपा में आए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पार्टी इसी वजह से अपने साथ जोड़े रखी है और उनकी नाराजगी को भी समय-समय पर दूर करती रहती है। इसमें भाजपा के सबसे प्रमुख चेहरे रवनीत सिंह बिट्टू हैं, जो कांग्रेस से भाजपा में आए थे। प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लो भी कांग्रेस से आए नेता हैं। इसके पहले अध्यक्ष रहे सुनील जाखड़ भी कांग्रेस से ही आए थे। उनको भी पार्टी ने अपनी गैर सिख राजनीत के दौर में प्रदेश की कमान सौंपी थी। पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड में भी इकबाल सिंह लालपुरा प्रमुख सिख चेहरे हैं.

‘पंजाब में है बदलाव का माहौल’

भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि पंजाब में बदलाव का माहौल है। पिछली बार इसका लाभ आम आदमी पार्टी ले गई थी, लेकिन वह जनता में जगह नहीं बना पाई। अब फिर से लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए नए विकल्प की तरफ देख रहे हैं, जिसमें भाजपा प्रमुख है। हालांकि, भाजपा ने अपने गैर सिख हिंदू समुदाय को भी साधने की रणनीति बरकार रखी है। इसके लिए तरुण चुग, सुनील जाखड़, विजय सांपला और आम आदमी पार्टी से आए राघव चड्ढा जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे हैं.

सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश

पार्टी ने राज्य में संगठन प्रभारियों की नियुक्ति में भी सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है। सतीश पुनिया पड़ोसी राजस्थान से प्रमुख जाट नेता हैं। उनके साथ सह-प्रभारी अलका गुर्जर और दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी भी पूरी तरह से जुटे हुए हैं। गौरतलब है कि पंजाब में लगभग 55 फीसदी आबादी सिख है, लगभग 38 प्रतिशत हिंदू और बाकी अन्य हैं। राज्य में सबसे ज्यादा दलित आबादी लगभग 32 फीसदी है। जाट सिख लगभग 19 फीसदी हैं। सत्ता में बदलाव के लिए सबसे अहम सिख समुदाय है, लेकिन वह बंटा हुआ है। भाजपा उसी का एक बड़ा हिस्सा अपने साथ जोड़ने की जद्दोजहद में है। खासकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के सिख समर्थन में सेंध लगाने की कोशिश की जा रही है.

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